આગળ કહેલ તે મુજબ જ કે જેવી દ્રષ્ટિ તેવી સૃષ્ટિ તો આ માટે મને એક ધારાવાહિકમાં આ એક કવિતા મળી જે મને ખૂબ જ ગમી માટે તે પણ અહીં આજના દિવસે જ રજૂ કરું છું…
जीवन है एक बहेती धारा,
एक किनारा सुख है जिसका,
दुःख है एक किनारा,
सुख-दुःख से अन्जाने हो कर,
जिसने जीना सिख लीया,
ईस जगको भी जीता उसने,
उस जगको भी जीत लीया
जहां धूप वहां छाया भी है,
जहां मोह वहां माया भी है,
माया के बंधन को छोडो,
मनका रिस्ता कभी ना तोडो,
जो अपने है दूर नही वो,
मिलने से मजबूर नही,
मनकी आंखोसे देखो,
पास सभी अपने लगते है,
हम हसते है तो हसते है वो,
हम रोते है तो वो है रोते,
दुनिया के सारे रिस्तोमें,
सबसे प्यारा मां का रिस्ता,
मां स्वर्ग की देवी जैसी,
मां जन्नत का एक फरिस्ता,
मां बच्चोके दिलमें बसती,
बच्चोके संग रोती-हसती,
चोट लगे जो बच्चोको तो,
आंसु मां को आते है,
ममता के आंचल में छुपकर,
सारे दुःख मिट जाते है,
मां तेरी ममता में मैने,
हसके वख्त गुजारा है
जीवन है एक बहेती धारा,
एक किनारा सुख है जिसका,
दुःख है एक किनारा
मां तेरी ईसी बात को सोच के चलता जाऊंगा,
जीवनपथ पर सुबह-शाम,
बस आगे बढता चला जाऊंगा

May 3, 2008 at 10:51 am |
nice poem.
September 1, 2008 at 5:25 pm |
[...] H..जीवन है एक … [...]
October 13, 2008 at 5:31 pm |
[...] H..जीवन है एक बहेती धारा… [...]